घर का बरामदा बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
बरामदे की योजना बनाते समय उसके आकार का निर्धारण उसके उपयोग के अनुसार करना चाहिए। उदाहरण के लिए, केवल प्रवेश द्वार के लिए बने साधारण बरामदे में दरवाजा खोलने और मेहमानों के आने-जाने के लिए कम जगह पर्याप्त होती है। वहीं, यदि बरामदे में बैठने की व्यवस्था या वाहन खड़ा करना हो, तो अधिक जगह की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, इन बातों का भी ध्यान रखें:- छत या छज्जा: बारिश और सीधी धूप से बचाव के लिए छत या छज्जा होना उपयोगी है।
- फर्श की ढलान और पानी की निकासी: बारिश का पानी प्रवेश द्वार के पास जमा न हो, इसके लिए फर्श में उचित ढलान और पानी की निकासी की व्यवस्था होनी चाहिए।
- फिसलन-रोधी फर्श: बाहर का फर्श गीला हो सकता है, इसलिए फिसलन रोकने वाली फर्श सामग्री का इस्तेमाल करना बेहतर है।
- प्रकाश व्यवस्था: रात के समय प्रवेश द्वार को सुरक्षित और आसानी से दिखाई देने योग्य बनाने के लिए पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए।
- मौसमरोधी फर्नीचर: यदि बरामदे के किनारे खुले हैं, तो ऐसा फर्नीचर चुनें जो बारिश, धूप और नमी को सह सके।
- नियमित सफाई: बाहरी फर्श, फर्नीचर और पर्दों या जालियों पर धूल, परागकण और गंदगी जमा हो सकती है, इसलिए इनकी नियमित सफाई जरूरी है।
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घर के कई हिस्से होते है जैसे किचन, पूजाघर, बेडरूम, टॉइलेट-बाथरूम, बाल्कनी, टेरेस, हॉल, सीढ़िया, पोर्च या पार्किंग एरिया आदी। घर के इन सभी स्थानों का अपना महत्व है; वास्तुशास्त्र में भी इन स्थानो की दिशा कहा होनी चाहिए इनके रंग क्या होने चाहिए इसके बारें में वर्णन है। घर के पोर्च को भी विशेष महत्व होता है तो porch meaning in hindi और ये पोर्च वास्तुअभ्यास एक अनुसार कैसा बनवाना चाहिए, इसके डिटेल्स यहा जानेंगे।
घर के आंतरिक नूतनिकरण के लिए नोब्रोकर प्रोफेशनल होम इंटेरियर्स से अवश्य कॉन्टैक्ट करेंपोर्च क्या होता है ?
पोर्च का मतलब होता है बरामदा; इसे घर का मुखमण्डप या द्वारमण्डप भी कहते है जो पोर्टिको (Portico) के नाम से प्रचलित है। घर के मुख्य द्वार के सामने इस पोर्च को बनवाया जाता है।
पोर्च को घर का सुरक्षा कवच कहा जाता है क्योंकि इसके होने की वजह से कोई भी बाधा आपके घर में सीधे तड़ाक से प्रवेश नहीं करेगी ऐसी धारणा है साथ ही ये एक आश्रय स्थान भी माना जाता है।
इस मण्डप को छत (रुफ) से कवर किया जाता है इससे मुख्य द्वार सुशोभित दिखता है; वास्तुशास्त्र के अनुसार ये रुफ त्रिकोंणीय आकार का नहीं होना चाहिए और पूरे मुखमण्डप को डार्क कलर देना आपको टालना होगा।
पोर्च पर व्हाइट, क्रीम, लाइट येलो ऐसे रंग अप्लाइ करें। पोर्टिको हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए अगर आप वहा अपनी कार या कोई गाड़ी खड़ी करते है तो उसका मूँह भी पूर्व या उत्तर में ही रहे।
घर को पोर्च होने का एक और फायदा ये है की कोई भी व्यक्ति या मेहमान डायरेक्ट आपके लिविंग रूम में एंटर नहीं करेगा वो आपके घर के पोर्च से होते हुए जरा ठहराव से घर के अंदर आएगा।
पोर्च या पोर्टिको आपके घर का प्रथमदर्शन करवाता है इसकी रचना से एक वेलकम का भाव प्रतीत होता है और ये घर का आंशिक भाग कवर करके आपके घर को सुरक्षा तथा सुंदरता प्रदान करता है।
तो इस जानकारी से porch kya hota hai और वास्तुशास्त्र के अनुसार इसकी दिशा क्या होनी चाहिए इसका ज्ञान आपको अवगत हो गया होगा।
घर के रेनोवेशन में चाहिए मदद? आज ही नोब्रोकर के एक्सपर्ट्स से संपर्क करें नोब्रोकर प्रोफेशनल पेंटिंग सर्विसेस् से संपर्क करके आपके घर की दीवारे बेहतरीन रंगों से सजाएइससे संबंधित विषय यहा पढ़े :
Dining room kya hota hai वास्तु के अनुसार पारिजात का पेड़ कब लगाना चाहिए Living room sajane ka tarikaYour Feedback Matters! How was this Answer?
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पोर्च क्या होता है
Yugandhar
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3 Year
2023-05-09T16:54:51+00:00 2023-05-22T11:10:07+00:00Comment
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