- छँटाई : वे घर के सामान को कई हिस्सों में बाँटने में मदद करते हैं और उसी हिसाब से सामान पैक करते हैं। रसोई(किचन) का सामान लिख कर पैक किया जाता है और ध्यान से संभाला जाता है जबकि नाज़ुक शो पीस अलग रखे जाते हैं।
- पैक करने की सामग्री(पैकेजिंग मैटेरियल) : पैकर्स एंड मूवर्स के पास सामान को सावधानी से पैक करने का सारा सामान रहता है और वे यह ध्यान रखते हैं कि आपका कोई नुकसान नहीं हो। गत्ते के डिब्बे, बबल रैप, टेप और यहाँ तक कि नाज़ुक और टूटने योग्य सामान के लिए लकड़ी की पेटी(क्रैट) भी होती है।
- व्यवस्थित: चूँकि ये उन लोगों का रोज़ाना का काम है इसलिए उनका सामान को छाँटने, पैक करने और लादने का तरीका व्यवस्थित रहता है जिससे सामान उतारने और जमाने में आसानी हो जाती है। वे बक्सों पर निशान लगा देते हैं जिससे सामान का पता चल जाए और योजनाबद्ध तरीके से काम हो जाए।
- बीमा(इंश्योरेन्स) और ओक्ट्रॉय :ये एक शहर से दूसरे शहर शिफ़्ट होते वक़्त ध्यान देने वाले ख़ास पहलु हैं क्यूंकि इनकी वजह से आइटम्स को शिफ़्ट करने में काफ़ी देरी हो सकती है। पैकर्स बीमा की सुविधा देते हैं और किसी भी नुकसान के लिए उनके पैकेज में बीमा शामिल होता है। वे ओक्ट्रॉय (चुंगी) को भी अपनी सर्विस कॉस्ट(सेवा मूल्य) के एक हिस्से की तरह ही मानते हैं। इससे बहुत ही प्रोफ़ेशनली और आसान ढंग से इन पहलुओं का ध्यान रखने में मदद मिलती है।
- कार ले जाने की और गोदाम की सुविधा : पैकर्स एंड मूवर्स यह जरूरी काम आसानी से उपलब्ध करवाते हैं। उनके पास कार ट्रांसपोर्ट करने की(कार लाने -ले जाने की) और गोदाम की सुविधा भी होती है जैसे कोल्ड स्टोरेज, लकड़ी के बक्से और यहाँ तक कि कंटेनर यार्ड्स भी। अगर आपके लिए जगह नई है, तो वे इस तरह की व्यवस्था आपके घर के पास करने में मदद करते हैं, इस लिहाज से ये भी एक बहुत ज़रूरी पहलु है।
- शाखाएँ(ब्रांचेज ): पैकर्स एंड मूवर्स की शाखाएँ लगभग सभी बड़े शहरों में होती हैं या उनकी जानकारी में दूसरे पैकर्स होते हैं जिनकी व्यवस्था सामान उतरवाने जैसी सुविधाओं के लिए वे आसानी से कर देते हैं और इन्हें नियम-कानून जैसे कि टैक्स, रास्ते और इमरजेंसी(आपातस्थिति) में जो चीज़े ज़रूरी हों उनकी अच्छी जानकारी होती है जिससे काम बिना परेशानी के हो जाता है।
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